मगर फिर मैंने नीतीश को फर्जी कहा है तो कुछ न कुछ तो होगा ही. चलिए बात निकली है तो दूर तलक जायेगी और हम इस पर एक छोटा सा चर्चा तो लिख ही देंगे. मगर हाँ आगे बढ़ने से पहले तो फोटो चस्पा दिया है देखिये शायद आपके पल्ले कुछ पड़ जाए.
हाँ तो बात इंटरनेट की और बिहार विधान सभा की क्यूंकि बात नीतीश से चली है. तहलका ने एक तहलका किया, इस तहलका ने पुरे देश को झकझोर के रख दिया तो भला इस से बिहार विधान सभा अछूता क्यूँ रहता. तत्कालीन तमाम विधायक ने एक स्वर में तहलका का गुणगान और जिंदाबाद के नारे लगाये थे मगर जब पत्रकारों ने विधायकों से जानना चाह कि ये तहलका क्या है तो सभी के सभी विधायक "इस साख पे उल्लू बैठा है ......." अर्थात बगलें झाँकने लगे थे.
तो बात इंटरनेट कि हो तो नीतीश के चापलूस दरबारी सरीखे विधायक और पार्षद भला क्यूँ पीछे रहें, आखिर यही तो एक रास्ता है जो नीतीश को भाता है. संजय झा पार्षद हैं और नीतीश के ब्लॉग कि देख रेख भी करते हैं या यूँ कहें कि नीतीश के लिए ब्लॉग लिखते हैं. अब ब्लॉग लिख कर वो तकनिकी के जानकार तो बन गए मगर नीतीश को सिर्फ ब्लॉग पर होने की बात कह कर अपना दायित्व नीतीश के प्रति दिखने में भूल गए कि तकनिकी और ब्लोगर का चोली दामन का साथ है.
जी हाँ संजय झा कहते हैं कि नीतीश जी सिर्फ ब्लॉग पर हैं और यहीं अपने विचार लिखते हैं मगर उनके विरोधाभास उनका ब्लॉग कर देता है जिस पर ट्विटर और फेसबुक का लिंक लगा हुआ है. अंतरजाल पर विचरण करने वालों से यह बताना मुर्खता होगी कि मैं ही अपने ब्लॉग पर लिंक लगा सकता हूँ कोई अन्य नहीं अर्थात अगर नीतीश जी का फेसबुक और ट्विटर प्रोफाइल फर्जी है तो नीतीश स्पीक अपने आप फर्जी हो जाता है.
कहने का तात्पर्य सिफ इतना कि फर्जी नीतीश से सावधान ना रहें मगर इसे अगर नीतीश स्पीक मानते हैं तो आप अपने आप निर्णय कर लें कि "........अंजामे गुलिस्तान क्या होगा"





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