नरेगा के तहत मजदूरों को मजदूरी की गारेंटी और रोजगार मिलता है मगर केंद्र के पैसे पर विकाश का ढिंढोरा पीटने वाले नीतीश ने बिहार के मजदूरों से निवाला छीन कर विकास पुरुष बनने के बहाने अपने अपने मंत्री संतरी और अपने भाई बह्तिजा वाद के साथ कुर्मी कोयरी कोशियारी विकाश में तल्लीन है. नौटंकी इतनी बड़ी की जहाँ जहाँ नीतीश फेल होता है केंद्र के नाम से रंडी रोना शुरू कर देता है.
बिहार का स्थान नरेगा के उपयोग में अंतिम है. बीमार से बीमार राज्य भी नरेगा का उपयोग करने में बिहार से आगे है . आंकड़ों के अनुसार वर्ष २०१०-२०११ में नरेगा का उपयोग करने में त्रिपुरा और आंध्र प्रदेश का स्थान 74.1 और 72.9 प्रतिशत के आंकड़ों के साथ शीर्ष पर हैं. आंकड़े कहते हैं कि पश्चिम बंगाल ५० प्रतिशत, उत्तर प्रदेश ३८.८ और राजस्थान ने 35.74 प्रतिशत इस योजना का लाभ उठाया. बिहार मात्र ७.३८ प्रतिशत नरेगा का ही उपयोग कर पाया. बिहार के बाद सबसे कम इस योजना का लाभ उठाने वाला राज्य मध्य प्रदेश और बिहार के बीच २१ प्रतिशत का अंतर है जो कि बिहार सरकार के है.
कहने को तो बिहार का विकास हो रहा है, परन्तु लगातार दो वर्षों से सूखा के बावजूद भी यदि नरेगा का उपयोग मात्र ७.३८ प्रतिशत होता है तो इसका दोषी निश्चित ही राज्य सरकार होगा. नीतीश के इसी कार्य की वजह से आज भी बिहार बीमारू राज्य के श्रेणी से नहीं निकल पा रहा है.
साभार : आर्यावर्त





1 टिप्पणियाँ: on "नीतीश नरेगा के पैसे खरचने में नाकाम, नरेगा हुआ बिहार में फेल. जिम्मेदार कौन?"
आपको लेख की भाषा पर ध्यान देना चाहिए.
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