Sunday, January 15, 2012

टी वी मीडिया और भारत की क्रिकेट.

भारत की क्रिकेट में लगातार हो रही हार पर हमारे मित्र भाई अलोक पुंज के अनुसार अब संयासों का दौर चलना चाहिए, बस परस्पर इसी विरोधाभास में भाई आलोक के कारण चंद शब्द निकल आये जो शायद कविता का रूप बन गए. आप सबों से साझा करता हूँ.


हम तो कहें कोई न ले संन्यास, ना बने सन्यासी बाबा.
चाहे हो क्रिकेट की दलाली या हो खबरों का बाजार.
क्या सचिन क्या प्रभु चावला.
डी पी को लेकर दीपक चौरसिया बावला.
सूट पहन कर बने गर रविश बिहारी तो,
प्रणव राय में है क्या खराबी.
बरखा रादिया का गर जारी रहे दलाली 
तो प्रसून क्यूँ करे कम अपनी बीमारी.
राजदीप का दलालों का करना स्वागत
प्रभु का सीधी सच्ची तिरछी तीखी बातों का आगत.
क्यूँ आखिर क्यूँ....
क्रिकेट को ही हम बनायें सन्यासी.
सब बाजारों का बोलबाला है..
क्या क्रिकेट क्या मीडिया...
सब लाला के आला हैं.


रजनीश के झा 

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